<p style="text-align: justify;"><strong>Can Air Pollution Trigger Asthma Attacks:</strong> दिल्ली जैसी बड़ी आबादी वाले शहरों में सुबह धुंध और धुएं की परत अब आम बात बन चुकी है. लोग इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही जहरीली हवा धीरे-धीरे शरीर के भीतर गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है. सांस के जरिए शरीर में पहुंचने वाले बेहद छोटे कण लंग्स के अंदर जाकर जमने लगते हैं और समय के साथ सांस फूलना, सीने में जकड़न, लगातार खांसी और दमा जैसी परेशानियों की वजह बन जाते हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मुंबई के जसलोक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के सीनियर डॉ. निमिष शाह ने TOI को बताया कि अनुसार वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है. यह कई वर्षों से लगातार बढ़ रहा है और अब इसका असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है. उनका कहना है कि रोजाना जहरीली हवा में रहना फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. ये असर डालती है और अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ाने का काम करती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लंग्स के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल हवा में मौजूद प्रदूषण सिर्फ धूल तक सीमित नहीं होता। इसमें बेहद महीन कण और कई हानिकारक गैसें शामिल होती हैं. ये छोटे कण शरीर की नेचुरल सुरक्षा को पार कर सीधे लंग्स की गहराई तक पहुंच जाते हैं. कुछ कण तो खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंचने लगते हैं. यही कारण है कि प्रदूषण का असर सिर्फ सांस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिल और शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि अस्थमा के मरीजों में खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं अचानक बढ़ जाती हैं. </p>
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<p style="text-align: justify;">वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं और घरों के भीतर बनने वाला धुआं इसके बड़े कारण माने जाते हैं. शहरों में रहने वाले लोग रोजाना इन चीजों के संपर्क में रहते हैं, जिससे शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्टडी में क्या निकला?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों की क्षमता कमजोर हो सकती है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. वहीं नेशनल हेल्थ संस्थान के आंकड़ों के अनुसार जब हवा की क्वालिटी खराब होती है, तब अस्पतालों में सांस और दमा के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी बाहरी वायु प्रदूषण को कैंसर पैदा करने वाले बड़े कारणों में शामिल कर चुका है. एक्सपर्ट के मुताबिक प्रदूषण शरीर में सूजन बढ़ाने के साथ-साथ सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हवा की क्वालिटी पर ध्यान दें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि लोग घर से बाहर निकलने से पहले हवा की क्वालिटी पर ध्यान दें. ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में मुंह ढंककर बाहर निकलना, घर के भीतर साफ हवा बनाए रखना और खुले में व्यायाम से बचना फायदेमंद माना जाता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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