<p style="text-align: justify;"><strong>Can Red Chilli Relieve Diabetic Nerve Pain:</strong> डायबिटीज के मरीजों में नर्व पेन यानी नसों से जुड़ा दर्द एक आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या है. कई लोगों को पैरों और हाथों में जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या बिजली के झटके जैसा दर्द महसूस होता है. अब एक नई रिव्यू में सामने आया है कि लाल मिर्च में पाया जाने वाला एक खास तत्व ऐसे दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं . </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या सच में लाल मिर्च फायदेमंद है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिव्यू में 1,800 से अधिक मरीजों पर किए गए 22 क्लीनिकल अध्ययनों का एनालिसिस किया गया. इसमें पाया गया कि लाल मिर्च से प्राप्त होने वाला कैप्साइसिननसों से जुड़े दर्द, खासकर डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी और पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया में राहत पहुंचा सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;">इस रिव्यू का नेतृत्व चेन्नई स्थित डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशियलिटी सेंटर के चेयरमैन और डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. वी. मोहन, मुंबई के शिल्पा मेडिकल रिसर्च सेंटर के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. मंगेश तिवास्कर, लीलावती अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभय नेने और चिकित्सा मामलों की एक्सपर्ट डॉ. सोनाली गोखले समेत अन्य एक्सपर्ट ने किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितना असरदार है लाल मिर्च?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट के अनुसार, 0.075 प्रतिशत कैप्साइसिन क्रीम सबसे प्रभावी पाई गई. यह एक ऐसी टॉपिकल क्रीम है जिसे त्वचा पर लगाया जाता है. इसमें लाल मिर्च के सक्रिय तत्व की नियंत्रित मात्रा मौजूद होती है, जो दर्द पैदा करने वाली नसों पर काम करती है. डॉ. वी मोहन का कहना है कि कैप्साइसिन को केवल दर्द निवारक बाम का हिस्सा समझना सही नहीं होगा. उनके मुताबिक यह नसों में दर्द के संकेत पहुंचाने वाले तंतुओं पर सीधे असर करता है. यही वजह है कि यह सामान्य दर्द निवारक उपायों से अलग माना जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि कम मात्रा वाले उत्पादों की तुलना में 0.075 प्रतिशत कैप्साइसिन फॉर्मूलेशन अधिक असरदार साबित हो सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किन दिक्कतों में यह असरदार?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. मंगेश तिवास्कर के अनुसार, फिलहाल सबसे मजबूत साइंटफिक प्रमाण डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी और पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया के लिए उपलब्ध हैं. हालांकि नसों से जुड़ा दर्द विटामिन बी की कमी, थायरॉइड की समस्या, अत्यधिक शराब के सेवन, कीमोथेरेपी या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण भी हो सकता है. ऐसे मामलों में भी स्थानीय स्तर पर राहत मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. एक्सपर्ट बताते हैं कि न्यूरोपैथिक पेन को अक्सर सामान्य दर्द समझ लिया जाता है, जिससे सही उपचार नहीं मिल पाता. कई लोग साधारण दर्द निवारक दवाओं या बाम का उपयोग करते हैं, जबकि वे नसों से जुड़े दर्द की मूल वजह पर असर नहीं डालते.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>किस बात का हमें रखना चाहिए ध्यान?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. सोनाली गोखले के अनुसार, यह रिव्यू बताती है कि 0.075 प्रतिशत कैप्साइसिन क्रीम को ऐसे मरीजों के लिए बेहतर विकल्प माना जा सकता है, जिन्हें लंबे समय तक दवाएं लेने में परेशानी होती है या जो स्थानीय स्तर पर उपचार चाहते हैं. हालांकि एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी प्रकार के नर्व पेन में खुद से इलाज शुरू करने के बजाय पहले डॉक्टर से सही जांच और सलाह जरूर लेनी चाहिए.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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