<p style="text-align: justify;"><strong>Why HbA1c Test May Give Wrong Results In Indians:</strong> डायबिटीज चेक करने के लिए जिस एचबीए1सी टेस्ट को अब तक सबसे भरोसेमंद माना जाता था, वही टेस्ट भारतीय लोगों के लिए कई बार गलत रिपोर्ट दे सकता है. नई रिसर्च में पता चला है कि खून से जुड़ी कई आम परेशानियां इस जांच के नतीजों को बदल देती हैं, जिससे बीमारी का सही समय पर पता नहीं चल पाता. यही वजह है कि अब डॉक्टर सिर्फ एक टेस्ट पर भरोसा करने के बजाय कई जांच एक साथ कराने की सलाह दे रहे हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रिपोर्ट और शरीर में क्यों दिख रहा है अंतर?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">TOI की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के फोर्टिस सी-डॉक सेंटर फॉर एक्सीलेंस में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के सामने एक ऐसा मामला आया जिसने डॉक्टरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. मध्य प्रदेश के एक 45 साल के आदिवासी मरीज का एचबीए1सी स्तर 5.8 प्रतिशत था. आमतौर पर इसे प्रीडायबिटीज माना जाता है, लेकिन उसका फास्टिंग ब्लड शुगर लगातार ज्यादा था और आंखों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण भी दिखने लगे थे. यानी रिपोर्ट कुछ और कह रही थी और शरीर कुछ और संकेत दे रहा था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इन चीजों की कमी रिपोर्ट पर डाल सकती है असर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद डॉ. अनूप मिश्रा, डॉ. शंबो सम्राट समाजदार, डॉ. शशांक आर. जोशी और डॉ. नवल के. विक्रम ने मिलकर एक रिसर्च की, जिसको द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में पब्लिश किया गया. इसमें सामने आया कि भारत और दक्षिण एशिया में एनीमिया, थैलेसीमिया, जी6पीडी की कमी और दूसरी खून से जुड़ी बीमारियां एचबीए1सी रिपोर्ट को गलत बना सकती हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे बदल जाती है रिपोर्ट?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">असल में एचबीए1सी टेस्ट पिछले तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है. लेकिन अगर रेड ब्लड सेल्स की उम्र बदल जाए तो रिपोर्ट भी बदल जाती है. भारत में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया बहुत आम है और यह एचबीए1सी को जरूरत से ज्यादा दिखा सकता है. वहीं जी6पीडी की कमी जैसी स्थिति में रेड ब्लड सेल्स जल्दी टूट जाती हैं, जिससे एचबीए1सी कम दिखाई देता है, जबकि असली ब्लड शुगर ज्यादा हो सकती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किस चीज की जांच है जरूरी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. अनूप मिश्रा का कहना है कि एचबीए1सी हीमोग्लोबिन से बनता है, इसलिए जो भी बीमारी हीमोग्लोबिन को प्रभावित करती है, वह इस टेस्ट की सटीकता खराब कर सकती है. उन्होंने साफ कहा कि भारतीयों में डायबिटीज की पहचान के लिए सिर्फ एचबीए1सी पर निर्भर रहना सही नहीं है. इसके बजाय ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, नियमित ब्लड शुगर जांच और जरूरत पड़ने पर लगातार ग्लूकोज मॉनिटरिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में कम उम्र में लोग हो रहे हैं शिकार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अमृता अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निशांत रायजादा भी मानते हैं कि भारत में लोग कम उम्र और कम वजन में भी डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं. ऐसे में सही जांच बेहद जरूरी हो जाती है. रिसर्च में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारत में हुए एक स्टडी में ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट ने करीब 88 प्रतिशत लोगों में प्रीडायबिटीज पकड़ ली, जबकि एचबीए1सी सिर्फ 45 प्रतिशत मामलों को पहचान पाया. एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले समय में डायबिटीज का इलाज प्रिसीजन मेडिसिन की तरफ बढ़ेगा, जहां सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं बल्कि मरीज की बॉडी, खानपान, जेनेटिक्स और लाइफस्टाइल को देखकर इलाज तय होगा. हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ऐसी एडवांस जांचें अभी हर आम इंसान की पहुंच में नहीं हैं.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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