<p style="text-align: justify;"><strong>What Is Causing Fever Deaths In Rajasthan Children:</strong> राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया इलाके में पिछले कुछ दिनों में सामने आए बच्चों की मौत के मामलों ने हेल्थ सिस्टम को अलर्ट मोड पर ला दिया है. 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच दो गांवों में छह छोटे बच्चों की बुखार के बाद मौत और 652 मरीज का इलाज होने से प्रशासन और मेडिकल विभाग हरकत में आ गया है. अब इस पूरी घटना को एक संभावित स्वास्थ्य संकट के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी गहन जांच शुरू कर दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर इसको लेकर वायरल इन्सेफलाइटिस की आशंका जता रहे है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>मेडिकल टीम जांच में जुटी</strong></p> <p style="text-align: justify;">स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज के एक्सपर्ट की एक टीम को मौके पर भेजा गया है. यह टीम जमीनी स्तर पर जाकर बीमारी के कारणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई इंफेक्शन है, <a title="मौसम" href="https://ift.tt/1pDJbka" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a>ी बीमारी है या फिर कोई नई स्वास्थ्य समस्या उभर रही है. इसके अलावा जयपुर से डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विस की टीम भी निगरानी और कंट्रोल के लिए तैनात की गई है. मुख्यमंत्री भजन लाल ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि मौतों के सही कारण का पता लगाया जाए और बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें -</strong> <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/lifestyle/indian-cities-sleep-patterns-delhi-wakes-up-late-mumbai-most-sleep-deprived-know-who-sleeps-how-much-3104182">दिल्ली की लेट मॉर्निंग...मुंबई की नींद गायब, जानिए भारतीय शहरों की स्लीप स्टोरी, कौन कितना सोता है?</a></p> <p style="text-align: justify;"><strong>2 से 4 साल के बच्चों की मौत</strong></p> <p style="text-align: justify;">मृत बच्चों की उम्र 2 से 4 साल के बीच बताई गई है, जो इस घटना को और भी संवेदनशील बना देती है. छोटे बच्चों में अचानक बुखार और फिर गंभीर हालत बनने के मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट को सतर्क कर दिया है. राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की और सभी विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए. वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौर ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे में लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा. गंभीर मामलों को बिना देरी के जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एन्सेफलाइटिस क्या होता है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट mayoclinic के अनुसार, एन्सेफलाइटिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें ब्रेन में सूजन आ जाती है. यह आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है, लेकिन कई बार शरीर की इम्यून ही गलती से मस्तिष्क पर हमला करने लगती है, जिसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहा जाता है. इस बीमारी के वायरस मच्छर और टिक जैसे कीड़ों के काटने से भी फैल सकते हैं. कुछ मामलों में इसका कारण क्लियर नहीं हो पाता.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या होते हैं इसके लक्षण?</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह बीमारी समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है. इसके लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी. लेकिन कुछ ही समय में यह गंभीर रूप ले सकती है. अगर इसमें मरीज की जान बच जाए, तो उसे भविष्य में सुनने की दिक्कत या मिर्गी के दौरे की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>बच्चे ही क्यों होते हैं चपेट में ज्यादा</strong></p> <p style="text-align: justify;">एन्सेफलाइटिस बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। इसका कारण यह है कि बच्चों की इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे सामान्य वायरल इंफेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं. हर्पीस और एंटेरोवायरस जैसे वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर ब्रेन तक पहुंच सकते हैं और वहां सूजन पैदा कर सकते हैं. वैसे यह बुखार हर उम्र के लोगों की अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन बच्चों की इम्यून क्षमता कमजोर होने के कारण वो जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं. </p> <p><strong>इसे भी पढ़ें:</strong> <a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/nail-colour-connection-with-health-nails-signs-can-be-dangerous-when-to-see-a-doctor-what-says-nail-colors-3081094">नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह</a></p> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>
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