क्यों HIV लाईलाज बीमारी है? जानिए क्यों कहा जाता है इसे बहरूपिया वायरस

<div id=":1n5" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":2ro" aria-controls=":2ro" aria-expanded="false"> <p style="text-align: justify;">हर साल वर्ल्ड एड्स डे पर दुनिया भर में एचआईवी महामारी को खत्म करने की अपील की जाती है, लेकिन सवाल आज भी वही है. इतनी वैज्ञानिक तरक्की के बावजूद एचआईवी का इलाज अब तक क्यों नहीं मिल पाया है. दरअसल एचआईवी को सबसे खतरनाक वायरस इसलिए माना जाता है क्योंकि यह शरीर के इम्यून सिस्टम को ही अपना निशाना बनाता है और बार-बार रूप बदलकर दवाओं को चकमा दे देता है. एचआईवी वायरस शरीर की सीडी 4 प्लस टी सेल पर हमला करता है, जो हमें बीमारियों से बचाने का काम करती है. जैसे- जैसे ये कोशिकाएं खत्म होती जाती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती जाती है. यही स्थिति आगे चलकर एड्स का रूप ले लेती है, जहां मामूली इंफेक्शन भी जानलेवा हो सकता है. <br /><br /><strong>HIV तेजी से रूप बदलने वाला बहरूपिया वायरस</strong><br /><br />HIV दुनिया के सबसे तेजी से म्यूटेशन करने वाले वायरस में शामिल है. हर बार जब यह अपनी कॉपी बनाता है, तो उसमें छोटे-छोटे बदलाव हो जाते हैं. इसी वजह से एक वैक्सीन उसके हर रूप पर असर नहीं कर पाती है. यही कारण है कि HIV को बहरूपिया वायरस कहा जाता है. HIV की सबसे बड़ी ताकत इसकी छिपने की क्षमता है. यह वायरस आंत, दिमाग और लिम्फ नोड्स जैसी जगहों पर निष्क्रिय अवस्था में छिपा रह सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में लेटेंट रिजर्वॉयर कहा जाता है. वहीं एआरटी दवाएं सिर्फ सक्रिय वायरस को कंट्रोल करती है, लेकिन छिपे हुए वायरस पर उनका असर नहीं होता है. इसके अलावा दवा बंद होते ही यही वायरस दोबारा एक्टिव हो जाता है.<br /><br /><strong>इलाज नहीं, सिर्फ कंट्रोल संभव</strong><br /><br />एचआईवी के इलाज को लेकर दो तरह के टारगेट पर काम चल रहा है. पहला स्टेरलाइजिंग क्योर, जिसमें शरीर से वायरस पूरी तरह खत्म हो जाए और फंक्शनल क्योर, जिसमें वायरस मौजूद रहे लेकिन कभी सक्रिय न हो. वहीं फिलहाल कुछ बहुत दुर्लभ मामलों को छोड़ दें, तो एचआईवी का पूर्ण इलाज संभव नहीं हो पाया है. एआरटी दवाएं वायरस को अनडिटेकटेबल लेवल तक जरूर ले जाती है, लेकिन शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं कर पाती है. <br /><br /><strong>रिसर्च और फंडिंग भी बड़ी चुनौती</strong><br /><br />एचआईवी पर रिसर्च जारी है, लेकिन कई बार फंडिंग की कमी और दूसरी महामारियों की वजह से इसका शोध पीछे चला जाता है. यही कारण है कि HIV Cure की दिशा में तेज और निरंतर प्रगति नहीं हो पाई है. वहीं एचआईवी के शुरुआती लक्षण अक्सर नॉर्मल वायरल जैसे होते हैं.&nbsp;&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/why-body-fat-is-reducing-but-weight-is-not-dropping-and-what-it-reveals-about-body-recomposition-3079867">बॉडी फैट तो घट रहा लेकिन वजन नहीं कम हो रहा, जानें कहां है दिक्कत</a></strong></p> <div id=":1n5" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":2ro" aria-controls=":2ro" aria-expanded="false"> <div dir="ltr"> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p> </div> </div> </div>

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