<p style="text-align: justify;">अल्जाइमर सिर्फ एक बीमारी नहीं है, यह धीरे-धीरे किसी इंसान की यादें, पहचान और आत्मनिर्भरता छीन लेने वाली स्थिति है. सबसे चिंता की बात यह है कि इसका असर महिलाओं पर पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा देखा जा रहा है. कई शोध बताते हैं कि महिलाएं न सिर्फ अल्जाइमर का ज्यादा शिकार होती हैं, बल्कि उनमें इसके लक्षण अक्सर जल्दी दिखाई देने लगते हैं. इसके बावजूद महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर इतनी गंभीर चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;">अक्सर याददाश्त में हल्की कमी, बार-बार चीजें भूलना, बेचैनी या भ्रम को उम्र का असर, तनाव या थकान कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. परिवार और समाज की यही अनदेखी आगे चलकर बड़ी समस्या बन जाती है. आज जब दुनिया भर में अल्जाइमर तेजी से बढ़ रहा है, तब यह समझना बेहद जरूरी है कि महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित क्यों होती हैं और क्या इसे रोका या धीमा किया जा सकता है. इसी बीच अब ओमेगा-3 फैटी एसिड को लेकर नई रिसर्च उम्मीद सामने आई है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>अल्जाइमर रोग क्या है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, यानी यह धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है. यह ज्यादातर 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन इसके लक्षण अचानक नहीं आते. इसके शुरुआती लक्षण हाल की बातें या घटनाएं भूल जाना, बार-बार एक ही सवाल पूछना, हाल ही में क्या खाया या किससे बात की, याद न रहना, आगे बढ़ने पर फैसले लेने में परेशानी, एक साथ कई काम न कर पाना, रास्ता या लोगों को पहचानने में दिक्कत, व्यवहार और भाषा में बदलाव हैं. यह बीमारी महीनों या सालों में धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए इसे समय रहते पहचानना बहुत जरूरी होता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा ज्यादा क्यों?</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>1.</strong> डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं. जैसे महिलाएं ज्यादा उम्र तक जिंदा रहती हैं. क्योंकि अल्जाइमर उम्र से जुड़ी बीमारी है, इसलिए महिलाओं में इसका जोखिम अपने आप बढ़ जाता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>2.</strong> मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है, जो दिमाग की कोशिकाओं की रक्षा करता है. इसके कम होने से मस्तिष्क ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>3.</strong> कई महिलाओं को पहले शिक्षा और मानसिक विकास के उतने अवसर नहीं मिले, जिससे उनका ब्रेन रिजर्व कमजोर रह सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>4.</strong> जेनेटिक कारण जैसे APOE4 नामक जीन महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है, जो अल्जाइमर के खतरे को बढ़ाता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>ओमेगा-3 क्या है और यह दिमाग के लिए क्यों जरूरी है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">ओमेगा-3 फैटी एसिड, खासकर DHA और EPA, दिमाग की हेल्थ के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.दिमाग का लगभग 50–60 प्रतिशत हिस्सा फैट से बना होता है. इसमें से बड़ा हिस्सा ओमेगा-3 फैटी एसिड का होता है. DHA दिमाग की कोशिकाओं की झिल्ली को मजबूत करता है. यह न्यूरोट्रांसमीटर के काम को बेहतर बनाता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता बनी रहती है. ओमेगा-3 की कमी से याददाश्त कमजोर हो सकती है. डिप्रेशन, मनोभ्रंश और अन्य मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या ओमेगा-3 अल्जाइमर से बचाव में मदद कर सकता है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">रिसर्च बताती है कि ओमेगा-3 कोई चमत्कारी इलाज नहीं है, लेकिन यह अल्जाइमर की रोकथाम में मदद कर सकता है. हल्की याददाश्त की समस्या (MCI) के दौर में इसका असर ज्यादा देखा गया है. यह दिमाग के साथ-साथ दिल की सेहत भी सुधारता है, जिससे मनोभ्रंश का खतरा कम होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में ओमेगा-3 का स्तर अच्छा होता है, उनमें मानसिक गिरावट अपेक्षाकृत धीमी होती है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>विकासशील देशों की महिलाओं के लिए यह क्यों जरूरी है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">कम आय वाले देशों में बुजुर्ग महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जैसे आर्थिक निर्भरता, डॉक्टरों और विशेषज्ञों तक सीमित पहुंच, मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से न लेना, ऐसे में ओमेगा-3 से भरपूर आहार, सही परामर्श और कम लागत वाले सप्लीमेंट एक प्रभावी उपाय हो सकते हैं. मछली, अलसी के बीज, अखरोट जैसे खाद्य पदार्थ इसमें मददगार हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सप्लीमेंट काफी नहीं हैं, समय पर स्क्रीनिंग, महिलाओं के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य योजनाएं, देखभाल करने वालों को समर्थन, स्थानीय स्तर पर और शोध की भी जरूरत है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें:<a href="https://ift.tt/Ff3duaK"> क्या वैक्सीन से ठीक हो सकता है पैंक्रियाज कैंसर, इसमें 90% मरीजों की हो जाती है मौत</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें </strong></p>
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