लाइट बंद कर नहाना क्यों बन रहा है नया ट्रेंड? जानिए डार्क शॉवरिंग के फायदे और असर

<div id=":25w" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":2pi" aria-controls=":2pi" aria-expanded="false"> <p style="text-align: justify;">आज के टाइम में जब दिन भर मोबाइल स्क्रीन, नोटिफिकेशन और लगातार भागदौड़ दिमाग को थका देती है, तब लोग शांति के छोटे-छोटे तरीके ढूंढते हैं. इन्हीं &nbsp;तरीकों में अब डार्क शॉवरिंग नाम का एक नया ट्रेंड सामने आया है. यह नाम सुनने में थोड़ा अजीब या ड्रैमेटिक लग सकता है, लेकिन असल में यह काफी नॉर्मल तरीका है. जिसमें कम या बिल्कुल बिना लाइट के नहाया जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि लाइट बंद करके नहाना क्यों नया ट्रेंड बन रहा है और डार्क शॉवरिंग के फायदे और असर क्या है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या है डार्क शॉवरिंग?</strong></p> <p style="text-align: justify;">डार्क शॉवरिंग का मतलब बिना तेज लाइट के लगभग अंधेरे में शावर लेना है. डार्क शॉवरिंग में न ब्राइट बाथरूम लाइट, न आईने में खुद को देखना और न ही कोई विजुअल &nbsp;डिस्ट्रेक्शन शामिल है. इसमें बस पानी की आवाज और कुछ पल की शांति होती है. वहीं लोग इसे इसलिए अपना रहे हैं, क्योंकि आज के समय में शोर सिर्फ आवाजों का नहीं बल्कि दिमाग पर पड़ने वाले लगातार इनपुट का भी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आम नहाने से कैसे अलग हैं यह तरीका?</strong></p> <p style="text-align: justify;">आमतौर पर नहाते वक्त भी दिमाग कहीं और होता है. दिन की प्लानिंग, पुरानी बातें और आगे की टेंशन यह सभी चीजें नहाते वक्त दिमाग में होती है. लेकिन लाइट बंद होने से दिमाग को कम संकेत मिलते हैं. देखने को कुछ नहीं होता, इसलिए ध्यान पानी के तापमान, सांस और शरीर की फीलिंग्स पर चला जाता है. कई लोग बताते हैं कि इससे शावर भले ही उतने ही समय का हो, लेकिन ज्यादा शांत और ठहराव भरा लगता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>डार्क शॉवरिंग को क्यों जोड़ा जा रहा है नींद और तनाव से?</strong></p> <p style="text-align: justify;">कम रोशनी शरीर को यह संकेत देती है कि अब रिलैक्स करने का समय आ गया है. &nbsp;अंधेरा दिमाग को अलर्ट मोड से बाहर निकालने में मदद करता है. यही वजह है कि रात में हल्की रोशनी की सलाह दी जाती है. वहीं डार्क शॉवरिंग भी इसी सोच पर काम करती है. कम सेंसरी इनपुट होने से तेज चल रहे विचार थोड़े धीमे पड़ सकते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि सोने से पहले अंधेरे में नहाने से उन्हें आसानी से नींद आती है. हालांकि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि एक हल्की से रिलैक्सिंग आदत है. वहीं जो लोग खुद को ज्यादा मानसिक थकान या ओवर स्टिमुलेशन महसूस करते हैं, उन्हें यह तरीका सुकून दे सकता है. &nbsp;जिन्हें मेडिटेशन मुश्किल लगता है, उनके लिए यह बिना किसी खास तकनीक के माइंडफुल ब्रेक जैसा काम करता है. हालांकि जिन लोगों को चक्कर आने या बैलेंस से जुड़ी समस्याएं रहती है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ट्रेंड से ज्यादा बन रही है एक शांत आदत</strong></p> <p style="text-align: justify;">डार्क शॉवरिंग का मतलब कुछ नया या ज्यादा करना नहीं है. यह बस रोजमर्रा के एक काम को थोड़ी शांति के साथ करना है. जब पूरा दिन रोशनी और शोर से भरा हो, तब कुछ मिनट का यह सुकून कई लोगों के लिए बहुत असरदार साबित हो रहा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/indian-diet-guide-for-insulin-therapy-indian-foods-that-work-healthy-with-insulin-therapy-3064051">शुगर कंट्रोल और टेस्ट दोनों, जानें इंसुलिन थेरेपी के लिए भारतीय डाइट गाइड</a></strong></p> </div>

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