<p style="text-align: justify;">स्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है, जिसमें दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है. इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है. कई बार व्यक्ति को सोते समय स्ट्रोक आता है और उसे इसका पता सुबह उठने पर चलता है. इसे वेक-अप स्ट्रोक कहा जाता है. इसमें व्यक्ति रात को सोने से पहले ठीक होता है, लेकिन सुबह उठने पर उसे बोलने, चलने या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में परेशानी होने लगती है. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक होता है. आइए जानते हैं कि सोते समय स्ट्रोक क्यों आता है और इसके लक्षणों को कैसे पहचान सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>सोते समय कैसे आ जाता है स्ट्रोक?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">स्ट्रोक किसी भी समय आ सकता है, यहां तक कि रात में सोते समय भी. ऐसा तब होता है, जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का जम जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है. इन दोनों ही स्थितियों में दिमाग को नुकसान पहुंचता है. कई बार व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि स्ट्रोक कब आया. उसे सुबह उठने पर शरीर में बदलाव महसूस होते हैं. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और दिल की कुछ बीमारियां स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं. इसके अलावा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत खानपान भी जोखिम बढ़ाने वाले कारण हैं. </p>
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<h3 style="text-align: justify;"><strong>सुबह उठने पर दिखते हैं ये लक्षण</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">सोते समय स्ट्रोक आने पर कई बार सुबह उठने के बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं. व्यक्ति को शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होती है. कुछ लोगों का चेहरा एक तरफ झुक जाता है, जबकि कुछ को बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होती है. इसके अलावा, अचानक धुंधला दिखाई देना, चक्कर आना और चलने में संतुलन बिगड़ना भी स्ट्रोक के संकेत होते हैं. कुछ मामलों में अचानक बहुत तेज सिरदर्द भी होता है. अगर सुबह उठने पर इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें थकान या नींद पूरी न होने की वजह समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये स्ट्रोक के संकेत होते हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रोक आने पर क्या करना चाहिए?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">अगर किसी व्यक्ति को सुबह उठने पर स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत मेडिकल मदद दिलानी चाहिए. डॉक्टर को यह बताना भी जरूरी है कि व्यक्ति को आखिरी बार कब ठीक देखा गया था और सुबह उठने पर कौन से लक्षण दिखाई दिए. स्ट्रोक के इलाज में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. कुछ मरीजों को खून का थक्का हटाने या दिमाग में खून का बहाव दोबारा शुरू करने के लिए खास इलाज दिया जाता है. इसके लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है. मरीज को खुद से कोई दवा नहीं देनी चाहिए, क्योंकि दिमाग की नस फटने और खून का थक्का जमने से होने वाले स्ट्रोक का इलाज अलग-अलग होता है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>*Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें*</strong></p>
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