<p style="text-align: justify;">दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर के साथ वायु प्रदूषण का असर फिर दिखाई देने लगा है. 22 अक्टूबर को दिल्ली का CPCB AQI 223 दर्ज किया गया. मौसम में बदलाव और हवा में प्रदूषकों की बढ़ती मात्रा के बीच डॉक्टर बच्चों और पहले से सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. हाल की रिपोर्टों में भी दिल्ली-एनसीआर में बदलते मौसम और खराब हवा के कारण बच्चों में अस्थमा और एलर्जी के लक्षण दिखाई दिए.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रदूषित हवा का असर केवल उन लोगों तक सीमित नहीं रहता जिन्हें पहले से अस्थमा है. हवा में मौजूद बारीक कण और अन्य प्रदूषक सांस की नलियों में जलन और सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में AQI पर नजर रखना और प्रदूषण बढ़ने पर अपनी लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करना बेहद महत्वपूर्ण है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अस्थमा के मरीज रहें ज्यादा सतर्क</h3>
<p style="text-align: justify;">अस्थमा में सांस की नलियां पहले से संवेदनशील होती हैं. जब प्रदूषित हवा शरीर में जाती है तो उसमें मौजूद PM2.5 जैसे महीन कण और दूसरे प्रदूषक वायुमार्ग को प्रभावित करते हैं. इससे पहले से नियंत्रित अस्थमा के लक्षण दोबारा उभर सकते हैं और उनकी गंभीरता बढ़ सकती है. बच्चों और एलर्जी या अस्थमा से परेशान लोगों को बदलते <a title="मौसम" href="https://ift.tt/oq8cCvK" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a> में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. खासकर सुबह और शाम के समय बाहर निकलते हुए स्थानीय AQI की स्थिति देखना बेहतर होता है.</p>
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<h3 style="text-align: justify;">इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज</h3>
<p style="text-align: justify;">प्रदूषण बढ़ने पर लगातार खांसी, गले में खराश, सीने में भारीपन, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज और आंखों में जलन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. अगर किसी व्यक्ति को पहले से अस्थमा है और सामान्य दवाओं के बावजूद सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने लगे, तो इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों में भी दिल्ली की खराब हवा के बीच खांसी, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">जब हवा की गुणवत्ता खराब हो, तो कम जरूरी आउटडोर गतिविधियों को कम करना बेहतर है. प्रदूषण ज्यादा होने वाले दिनों में बाहर दौड़ना, तेज एक्सरसाइज या लंबे समय तक खुले में रहने से बचना चाहिए. खराब हवा के दौरान एक्सरसाइज का समय और स्थान बदलना सही हगा. बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला मास्क प्रदूषित कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है. घर के अंदर धूल, धुआं और तेज खुशबू वाले उत्पादों से भी दूरी रखें. कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें, लेकिन जब बाहर की हवा बहुत खराब हो तब खिड़कियां लंबे समय तक खुली रखने से बचना बेहतर है.</p>
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