<p style="text-align: justify;">अगर आपको एसिडिटी है और आप सीधे मेडिकल स्टोर से दवा ले लेते हैं तो अब ऐसा नहीं होगा. नए नियम के मुताबिक, अब मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टरी सलाह या पर्ची के एसिडिटी की दवा नहीं दे सकेंगे. सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की ओर से ऐसी शर्त रखी गई है. इसमें कहा गया है कि एसिडिटी की दवा वोनोप्रीजन की बिक्री डॉक्टर की पर्ची के साथ ही की जाए. </p>
<p style="text-align: justify;">CDSCO की ओर से कहा गया है कि अगर किसी को बार-बार एसिडिटी होती है और वह लंबे समय से दवा ले रहा है तो इसकी वजह पता करना जरूरी है. कुछ दवाओं को लंबे समय तक लेने पर शरीर में विटामिन बी12 और मैग्नीशियम की कमी हो सकती है. कुछ लोगों में दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को ये दिक्कत होगी. लेकिन अगर रोज या लंबे समय तक दवा लेने की जरूरत पड़ रही है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पेट और आंतों से जुड़ी बीमारी में भी पर्ची जरूरी </h3>
<p style="text-align: justify;">एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली वोनोप्राजान दवा को लेकर एक जरूरी बदलाव बताया गया है. 10 और 20 मिलीग्राम की यह दवा भारत में पहले से मंजूर है. अब इसकी दुकान से बिक्री डॉक्टर की पर्ची के आधार पर करने की बात कही गई है. खासतौर पर पेट और आंतों से जुड़ी बीमारी के डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी. दवा को लेकर आगे भी टेस्ट करने की बात कही गई है. इसलिए इसे अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.</p>
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<h3 style="text-align: justify;">फैटी लिवर के इलाज में इन दवाओं पर हो रहा टेस्ट</h3>
<p style="text-align: justify;">बता दें, फैटी लिवर के इलाज के लिए कुछ नई दवाओं पर भी काम चल रहा है. इनमें एफ्रुक्सिफर्मिन और रेसमेटिरोम नाम की दवाएं शामिल हैं. एफ्रुक्सिफर्मिन के तीसरे चरण का टेस्ट आगे बढ़ाने की बात कही गई है. यह उन मरीजों के लिए है जिनके लिवर में फैट के साथ सूजन और लिवर को नुकसान होने जैसी समस्या हो सकती है. वहीं रेसमेटिरोम की अलग-अलग मात्रा वाली दवा पर भी तीसरे चरण के टेस्ट की बात हुई है. इन टेस्ट का मकसद यह देखना है कि दवा मरीजों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कब्ज और पेट दर्द के लिए नई दवा पर काम</h3>
<p style="text-align: justify;">लंबे समय से कब्ज रहने के साथ अगर पेट में दर्द और दूसरी परेशानी भी होती है तो इसे IBS-C कहा जाता है. इस समस्या के इलाज के लिए लिनाक्लोटाइड नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके 72 और 145 माइक्रोग्राम वाले रूप को लंबे समय से कब्ज की समस्या के लिए इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है. वहीं कब्ज के साथ पेट दर्द और दूसरी परेशानी वाले मरीजों के लिए 290 माइक्रोग्राम वाली दवा पर भी टेस्ट की बात सामने आई है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सिकल सेल बीमारी में बच्चों पर भी होगा दवा का टेस्ट</h3>
<p style="text-align: justify;">सिकल सेल बीमारी के इलाज से जुड़ी एटावोपिवाट नाम की दवा पर भी टेस्ट चल रहा है. अब इसके तीसरे चरण के टेस्ट में 6 से 12 साल की उम्र के बच्चों को शामिल करने की सिफारिश की गई है. इस तरह के टेस्ट में यह देखा जाता है कि दवा बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित है और बीमारी में कितना फायदा करती है. इसलिए अभी इसे सभी बच्चों के लिए सामान्य दवा नहीं माना जा सकता. दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए.</p>
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