Pradeep Rawat Death: किस कैंसर से पीड़ित थे आमिर-असिन की जिंदगी तबाह करने वाले 'गजनी'?

<p style="text-align: justify;"><strong>Actor Pradeep Rawat Death News Blood Cancer:</strong> फिल्म 'गजनी' और 'लगान' में अपने किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले एक्टर प्रदीप रावत का मंगलवार शाम भिवंडी के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 74 साल के थे और पिछले करीब पांच साल से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे. उनके बिजनेस मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने &nbsp;इसकी जानकारी दी. उनके मुताबिक प्रदीप रावत पहले बीमारी से रिकवर हो गए थे, लेकिन कुछ महीने पहले कैंसर दोबारा लौट आया था. पिछले कुछ महीनों से वह अस्पताल में भर्ती थे और बीते कुछ दिनों में उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई थी.</p> <p style="text-align: justify;">हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट clevelandclinic के अनुसार, ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर में ब्लड सेल्स बनने और उनके काम करने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है. दुनिया में हर साल करीब 12 लाख लोग ब्लड कैंसर से प्रभावित होते हैं. इसके ज्यादातर मामले बोन मैरो से शुरू होते हैं. बोन मैरो हड्डियों के अंदर मौजूद मुलायम और स्पंजी हिस्सा होता है, जहां स्टेम सेल्स बनते हैं. यही स्टेम सेल्स आगे चलकर रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स में बदलते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://ift.tt/StoqFAO" /></p> <p style="text-align: justify;">रेड ब्लड सेल्स शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स संक्रमण से लड़ते हैं, जबकि प्लेटलेट्स खून बहने को रोकने में मदद करते हैं. ब्लड कैंसर होने पर शरीर में ब्लड सेल्स बनने की सामान्य प्रक्रिया बिगड़ जाती है. असामान्य कैंसर सेल्स तेजी से बढ़ने लगते हैं और सामान्य ब्लड सेल्स की जगह लेने लगते हैं. ये असामान्य सेल्स सामान्य ब्लड सेल्स की तरह अपना काम भी नहीं कर पाते.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कितने प्रकार का होता है ब्लड कैंसर?</strong></p> <p style="text-align: justify;">ब्लड कैंसर मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है. पहला ल्यूकेमिया है, जिसकी शुरुआत आमतौर पर बोन मैरो से होती है. इसमें असामान्य और अक्सर अपरिपक्व व्हाइट ब्लड सेल्स तेजी से बढ़ने लगते हैं और खून में पहुंच सकते हैं. दूसरा लिम्फोमा है, जो शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है. इसकी शुरुआत लिम्फोसाइट्स नाम के व्हाइट ब्लड सेल्स से होती है. इसके दो प्रमुख प्रकार हॉजकिन लिम्फोमा और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा हैं.</p> <p style="text-align: justify;">तीसरा मायलोमा है, जिसकी शुरुआत बोन मैरो में होती है और यह प्लाज्मा सेल्स को प्रभावित करता है. मल्टीपल मायलोमा इसका सबसे आम प्रकार है. इसके अलावा मायलोप्रोलिफेरेटिव नियोप्लाज्म और मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम जैसे कुछ दुर्लभ ब्लड कैंसर भी होते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://ift.tt/eOikbaq" /></p> <p style="text-align: justify;"><strong>ब्लड कैंसर के लक्षण क्या हैं?</strong></p> <p style="text-align: justify;">ब्लड कैंसर के लक्षण इसके प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं. लगातार थकान, सांस फूलना, लिम्फ नोड्स में सूजन और बार-बार संक्रमण होना इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं. इसके अलावा हड्डियों या जोड़ों में दर्द, रात में बहुत ज्यादा पसीना आना, लिवर या स्प्लीन का बढ़ना, लगातार बुखार और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी इसके संकेत हो सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;">शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना या असामान्य ब्लीडिंग भी ध्यान देने योग्य संकेत हैं. त्वचा पर छोटे लाल धब्बे या बैंगनी पैच दिखाई दे सकते हैं. हालांकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं. इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर ब्लड कैंसर नहीं माना जा सकता. अगर परेशानी कई सप्ताह तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्यों होता है ब्लड कैंसर?</strong></p> <p style="text-align: justify;">ब्लड कैंसर तब शुरू हो सकता है जब ब्लड सेल्स के डीएनए में बदलाव यानी म्यूटेशन होने लगता है. डीएनए कोशिकाओं को बताता है कि उन्हें कब बढ़ना, विभाजित होना और खत्म होना है. डीएनए में गड़बड़ी होने पर असामान्य ब्लड सेल्स तेजी से बढ़ने लगते हैं. धीरे-धीरे ये सामान्य सेल्स को पीछे छोड़ देते हैं और बोन मैरो पर्याप्त स्वस्थ ब्लड सेल्स नहीं बना पाता.</p> <p style="text-align: justify;">उम्र बढ़ने के साथ ब्लड कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है. पुरुषों में कुछ ब्लड कैंसर अधिक पाए जाते हैं. धूम्रपान या सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में रहना, लंबे समय तक बेंजीन और फॉर्मल्डिहाइड जैसे केमिकल्स के संपर्क में रहना, पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी लेना और कुछ आनुवंशिक स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं. कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में पारिवारिक इतिहास भी भूमिका निभा सकता है. हालांकि अधिकांश मरीजों के परिवार में पहले ब्लड कैंसर का मामला होना जरूरी नहीं है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कैसे होती है ब्लड कैंसर की जांच?</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं. इसके बाद ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है. कम्प्लीट ब्लड काउंट यानी CBC से रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की संख्या देखी जाती है. ब्लड केमिस्ट्री टेस्ट भी किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर CT स्कैन, MRI और PET स्कैन जैसी इमेजिंग जांच की जाती हैं. बोन मैरो बायोप्सी भी महत्वपूर्ण जांच है, जिसमें बोन मैरो का नमूना लेकर सामान्य और असामान्य ब्लड सेल्स की जांच की जाती है. कैंसर को बढ़ाने वाले जेनेटिक बदलावों का पता लगाने के लिए भी जांच हो सकती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ब्लड कैंसर का इलाज कैसे होता है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">इलाज कैंसर के प्रकार और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है. कीमोथेरेपी ब्लड कैंसर के प्रमुख उपचारों में शामिल है. इसमें दवाओं की मदद से कैंसर सेल्स को खत्म करने या उनकी बढ़त रोकने की कोशिश की जाती है. रेडिएशन थेरेपी में रेडिएशन से असामान्य सेल्स के डीएनए को नुकसान पहुंचाया जाता है. इम्यूनोथेरेपी शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद करती है. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और CAR T-cell थेरेपी इसके उदाहरण हैं. टारगेटेड थेरेपी कैंसर सेल्स की खास कमजोरियों या जेनेटिक बदलावों को निशाना बनाती है.</p> <p style="text-align: justify;">कुछ मरीजों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है. ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में मरीज के अपने स्वस्थ स्टेम सेल्स को सुरक्षित करके हाई डोज कीमोथेरेपी के बाद वापस शरीर में दिया जाता है. वहीं एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में उपयुक्त डोनर से स्वस्थ स्टेम सेल्स लिए जाते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें:&nbsp;<a 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style="text-align: justify;">ब्लड कैंसर को पूरी तरह रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है. स्वस्थ व्यक्ति को भी यह बीमारी हो सकती है. हालांकि धूम्रपान से दूरी और हानिकारक केमिकल्स के लंबे संपर्क से बचना कुछ जोखिम कम कर सकता है.</p> <p><strong>इसे भी पढ़ें:&nbsp;<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/cheating-really-mistake-why-people-cheat-in-relationships-psychology-explained-3168848">Relationship Cheating: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अचानक हुई गलती नहीं, जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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