शरीर का वो अंग जहां कभी पसीना नहीं आता, जबकि इस वाले हिस्से में सबसे ज्यादा आता है

<p style="text-align: justify;">गर्मी के दिन में शरीर से पसीना निकलना आम बात है और शरीर के लिए अच्छा भी माना जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शरीर गर्म होने पर पसीना निकलता है. जिसके बाद शरीर को गर्मी कम लगती है. गर्मी के दिनों में पसीना कांख और पीठ में ज्यादा होता है. एपोग्रीन ग्रंथियां (apocrine glands) पसीना पैदा करती हैं और यहां एक बैक्टीरिया भी बनता है जिसके पसीने की बदबू होती है. हाथ, पैर, सिर, कांख, जांघ, पीठ हर जगह से पसीना निकलता है. लेकिन आपने गौर किया होगा कि होंठ से पसीना नहीं निकलता है. आइए जानते हैं आखिर किस वजह से होंठ से पसीना नहीं निकलता है? दरअसल होठों में पसीने की ग्रंथि (sweat gland) नहीं होती है. शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में होंठों के जल्दी सूखने का एक बड़ा कारण यह भी है.&nbsp;</p> <p>जैसा कि आपको पता है होंठ इंसान के शरीर सबसे खूबसूरत अंगों में से एक हैं. &nbsp;होंठ का उपयोग बोलने, खाने के लिए किया जाता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि होंठ का रंग शरीर से थोड़ा अलग होता है. किसी के पिंक, काल, ब्राउन तो हल्के ब्राउन एंड व्हाइट कलर के होते हैं.&nbsp;</p> <p><strong>होंठों पर इसलिए नहीं आता है पसीना</strong></p> <p>होंठों पर इसलिए पसीना नहीं आता है क्योंकि होठों में पसीने निकालने वाला ग्लैंड स्वेट ग्लैंड (sweat gland) नहीं होता है. शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में गर्मी या ज्यादा सर्दी में होंठ जल्दी सूखने का एक बड़ा कारण भी है. पसीने पैदा करने वाले ग्लैंड का नाम एक्सोक्राइन ग्लैंड हैं जो पूरे शरीर की सतह पर फैली हुई हैं. उन्हें कभी-कभी सुडोरिफेरस या सुडोरिपेरस ग्लैंड के रूप में जाना जाता है. ये नाम लैटिन शब्द 'सुडोर' से लिया गया है जिसका अर्थ है 'पसीना'.&nbsp; दो तरह के ग्लैंड होते हैं जो पसीना निकालते हैं.&nbsp;</p> <p><strong>Eccrine</strong></p> <p>Eccrine ग्लैंड पूरे शरीर में पाई जाती है. सिर्फ इतना ही नहीं यह एक वाटरी तत्व सिक्रेट करती है. जिससे पसीना निकलता है और बॉडी ठंडा रहता है.&nbsp;</p> <p><strong>एपोक्राइन</strong></p> <p>एपोक्राइन पसीने निकालने वाला ग्लैंड कांख, बगल और पेरिअनल क्षेत्र में पाई जाती हैं, और एक अधिक चिपचिपा, गंध वाले पसीने निकालती हैं.&nbsp;</p> <p><strong>एक्राइन ग्लैंड कैसे काम करती है?</strong></p> <p>थर्मोरेगुलेटरी पसीने के लिए एक्राइन ग्लैंड जिम्मेदार होती हैं. सीधे शब्दों में कहा जाए तो तापमान बहुत अधिक होता है, तो ये ग्रंथियां पसीना छोड़ती हैं जो बाद में भाप हो जाता है और शरीर से गर्मी को बाहर निकालता है. इस प्रकार का शारीरिक पसीना पहले सिर और माथे की त्वचा में शुरू होता है, फिर चेहरे और बाकी त्वचा पर. थर्मोरेगुलेटरी पसीना हथेलियों और तलवों पर पसीना निकालती हैं. थर्मोरेगुलेटरी ग्लैंड के कारण इमोशनल स्ट्रेस के वक्त भी पसीना आता है. इस स्थिति में सबसे पहले हथेलियों, तलवों और बगलों में पसीना आता है.</p> <p><strong>एपोक्राइन ग्रंथियां</strong>&nbsp;</p> <p>एपोक्राइन ग्रंथियां कुंडलित ट्यूबलर पसीने की ग्रंथियां हैं जो स्किन के बालों के रोम से जुड़ी होती हैं. वे कांख की त्वचा, एरोला, निपल्स, पेरिअनल त्वचा और बॉडी के बाहरी त्वचा में पाए जाते हैं. एपोक्राइन ग्रंथियां एक चिपचिपा, तैलीय पदार्थ का स्राव करती हैं, जो पीले रंग का होता है, और इसमें तीखी गंध होती है. यह ग्लैंड यंग लोगों में ज्यादा एक्टिव रहता है.&nbsp;</p> <p><strong>ये भी पढ़ें: <a title="शरीर के इन हिस्सों पर भूलकर भी न बनवाएं टैटू, वरना भुगतना पड़ेगा खतरनाक अंजाम" href="https://ift.tt/IW9aoZ3" target="_self">शरीर के इन हिस्सों पर भूलकर भी न बनवाएं टैटू, वरना भुगतना पड़ेगा खतरनाक अंजाम</a></strong></p>

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